Santosh Kumar Yadav / Sun, Aug 30, 2026 / Post views : 127
हरिद्वार। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत के हिंदू-मुस्लिम एकता और भाईचारे को लेकर दिए गए बयान का धर्मनगरी हरिद्वार में संतों और उत्तराखंड मदरसा बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष ने स्वागत किया है।
न्यूयॉर्क में एक कार्यक्रम के दौरान मोहन भागवत ने कहा था कि जो हिंदू मुस्लिम को अपना विरोधी मानता है, वह हिंदुत्व को नहीं समझता। उनके इस बयान पर अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत रविंद्र पुरी ने सहमति जताते हुए कहा कि समाज में आपसी भाईचारा बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने कहा कि मुसलमानों का विरोध करने की आवश्यकता नहीं है, बल्कि उन्हें साथ लेकर आगे बढ़ना चाहिए।
वहीं, उत्तराखंड मदरसा बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष मुफ्ती शमून कासमी ने भी मोहन भागवत के बयान का स्वागत किया। उन्होंने मुसलमानों से अपनी दूरी कम करने और समाज में सकारात्मक भूमिका निभाने की अपील की। कासमी ने कहा कि यह समय आपसी दूरियां खत्म करने का है। उन्होंने मुसलमानों से अपने चरित्र में सुधार करने, सामाजिक बुराइयों को दूर करने और भ्रष्टाचार के खिलाफ खड़े होने की अपील की।
इससे पहले रुद्रपुर में मौलवी के बयान को लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के चेतावनी भरे रुख का भी श्रीमहंत रविंद्र पुरी और मुफ्ती शमून कासमी ने समर्थन किया। श्रीमहंत रविंद्र पुरी ने कहा कि सरकार ने अवैध मजारों के खिलाफ कार्रवाई की है और भड़काऊ बयानों को लेकर भी सरकार सख्त रुख अपना सकती है।
मुफ्ती शमून कासमी ने कहा कि मदरसा बोर्ड को समाप्त नहीं किया गया है, बल्कि उसका विस्तार किया गया है। उन्होंने कहा कि जो मदरसे वैध थे, उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई है। उनके मुताबिक, सरकार के इस कदम से मुस्लिम समाज के बच्चों को भी बेहतर शिक्षा के अवसर मिलेंगे और वे आगे चलकर आईएएस और इंजीनियर बन सकेंगे।
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