Santosh Kumar Yadav / Thu, Aug 27, 2026 / Post views : 119
देहरादून। उत्तराखंड को आपदा सुरक्षित बनाने की दिशा में विश्व बैंक ने राज्य को अपना सहयोग आगे भी जारी रखने का भरोसा दिया है। विश्व बैंक के मैनेजिंग डायरेक्टर एवं चीफ नॉलेज ऑफिसर पास्कल डोनोहोई ने कहा कि उत्तराखंड भौगोलिक परिस्थितियों के कारण आपदाओं की दृष्टि से बेहद संवेदनशील राज्य है। ऐसे में आपदा जोखिम न्यूनीकरण के लिए आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक अध्ययन और मजबूत संस्थागत क्षमता का लगातार विकास जरूरी है।
पास्कल डोनोहोई के नेतृत्व में विश्व बैंक की हाई लेवल टीम ने बुधवार को उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (यूएसडीएमए) का भ्रमण किया। इस दौरान टीम ने आपदा प्रबंधन और आपदा जोखिम न्यूनीकरण के क्षेत्र में विश्व बैंक के सहयोग से संचालित विभिन्न परियोजनाओं की समीक्षा की और उनकी प्रगति की जानकारी ली।
टीम ने विशेष रूप से विश्व बैंक पोषित योजनाओं और यू-प्रिपेयर परियोजना के तहत किए जा रहे कार्यों की जानकारी ली। भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों में जोखिम कम करने के लिए अपनाई जा रही तकनीकों, सुरक्षा उपायों और राज्य के सामने मौजूद चुनौतियों पर भी चर्चा हुई।

विश्व बैंक की टीम ने यू-प्रिपेयर परियोजना के तहत अत्याधुनिक भूकंपरोधी एवं बेस आइसोलेशन तकनीक से निर्मित यूएसडीएमए भवन का भी निरीक्षण किया। टीम को भवन की संरचनात्मक विशेषताओं और भूकंप जैसी आपदाओं के दौरान इसकी सुरक्षा क्षमता के बारे में जानकारी दी गई।
विश्व बैंक टीम ने भवन में अपनाई गई आधुनिक तकनीकों और आपदा प्रतिरोधी निर्माण की सराहना की।

सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास ने विश्व बैंक की ओर से मिल रहे सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने बताया कि विश्व बैंक के सहयोग से उत्तराखंड में 36 पुलों का निर्माण किया जा रहा है। इसके अलावा आपदा शेल्टर के निर्माण, अत्याधुनिक उपकरणों की खरीद और स्लोप स्टैबिलाइजेशन से जुड़े कार्य भी किए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं के माध्यम से राज्य के विभिन्न विभागों की आपदाओं से निपटने की क्षमता को मजबूत किया जा रहा है, ताकि आपदा की स्थिति में त्वरित और प्रभावी प्रतिक्रिया सुनिश्चित की जा सके।

उत्तराखंड जैसे पर्वतीय और आपदा संवेदनशील राज्य में आपदा जोखिम न्यूनीकरण को प्राथमिकता देते हुए सुरक्षित एवं मजबूत बुनियादी ढांचे के विकास पर जोर दिया जा रहा है। विश्व बैंक की टीम ने यूएसडीएमए के प्रयासों की सराहना करते हुए भविष्य में भी वित्तीय सहयोग जारी रखने की प्रतिबद्धता जताई।
इस अवसर पर विश्व बैंक एवं यूएसडीएमए के वरिष्ठ अधिकारी और विशेषज्ञ मौजूद रहे।
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