Santosh Kumar Yadav / Thu, Aug 27, 2026 / Post views : 174
अयोध्या। राम मंदिर में इस बार रक्षाबंधन का पर्व विशेष धार्मिक परंपरा के साथ मनाया जाएगा। सावन शुक्ल पूर्णिमा के अवसर पर सुबह करीब 6 बजे भगवान रामलला को उनकी बड़ी बहन शांता की ओर से आई जरी और मोतियों से सजी विशेष राखी अर्पित की जाएगी।
शनिवार को तमसा नदी के किनारे स्थित श्रृंगऋषि आश्रम से श्रृंगऋषि बाबा महोत्सव सेवा समिति के सदस्य विधि-विधान से पूजा-अर्चना के बाद राखी लेकर अयोध्या पहुंचे। ढोल-नगाड़ों के साथ भक्तिमय माहौल में पहुंचे श्रद्धालुओं ने राखी को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास के उत्तराधिकारी एवं धार्मिक समिति के सदस्य महंत कमलनयन दास तथा रामलला के वरिष्ठ पुजारी संतोष कुमार को सौंपा।
धार्मिक मान्यता के अनुसार महाराजा दशरथ की एक पुत्री शांता भी थीं, जिन्हें बाद में उनके मित्र को गोद दे दिया गया था। मान्यता है कि आगे चलकर शांता का विवाह महर्षि श्रृंगी ऋषि से हुआ।
इसी परंपरा की स्मृति में प्रत्येक वर्ष रक्षाबंधन के अवसर पर श्रृंगऋषि आश्रम से भगवान रामलला के लिए प्रतीकात्मक राखी अयोध्या भेजी जाती है। इस वर्ष भी आश्रम में तीन दिनों तक पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठान और श्रीराम राखी महोत्सव आयोजित किया गया। अनुष्ठान पूर्ण होने के बाद राखी को ढोल-नगाड़ों के साथ अयोध्या लाया गया।
प्रेम और सामाजिक समरसता का संदेश
महंत कमलनयन दास ने कहा कि रक्षाबंधन प्रेम, समता और सामाजिक समरसता का पर्व है। यह समाज में आपसी प्रेम और भाईचारे को मजबूत करने के साथ भेदभाव और वैमनस्य को दूर करने का संदेश देता है।
महंत सीताराम दास ने कहा कि भारतीय संस्कृति में यह परंपरा लंबे समय से चली आ रही है। बहन शांता की ओर से प्रत्येक वर्ष श्रृंगऋषि आश्रम से रामलला के लिए राखी भेजी जाती है और उसी परंपरा का निर्वहन करते हुए इस वर्ष भी राखी अयोध्या पहुंचाई गई है।
रक्षाबंधन के दिन सुबह श्रृंगार आरती के बाद शांता की ओर से आई विशेष राखी भगवान रामलला को अर्पित की जाएगी। अयोध्या में होने वाला यह आयोजन श्रद्धालुओं के लिए धार्मिक आस्था, परंपरा और भाई-बहन के पवित्र रिश्ते का विशेष अवसर होगा।
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